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निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल । अंग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन पै निज भाषा-ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन । उन्नति पूरी है तबहिं जब घर उन्नति होय निज शरीर उन्नति किये, रहत मूढ़ सब कोय ।

 

मानव

 मात्र के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम होने में अपना योगदान करना । ग्रामीण जीवन की प्रगति एवं विकास के नये रास्तों को इंगित करना एवं पुरानी परम्पराओं एवं तीज-त्यौहारों का वैज्ञानिक विश्लेषण करना एवं उनकी उपयोगिता-अनुपयोगिता का वैज्ञानिक विश्लेषण करना । मूलवर्धन शिक्षा के विकास में अपना योगदान करना । युवाओं को उत्पादकता की उपयोगिता एवं राष्ट्र में इसकी भूमिका से अवगत कराना एवं उन्हें उत्पादकता के प्रति सार्थक दृष्टिकोण रखने हेतु प्रेरित करने का करना । विभिन्‍न सामाजिक विकृतियों एवं कुरीतियों पर अपना दृष्टिकोण स्थापित करना । इसके अतिरिक्‍त किताबी एवं प्रचलित दृष्टिकोण से हटकर कुछ अन्य रास्तों एवं उपायों पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करना ।

...सुमन वी आनन्द

 
 
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